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बेड़ी नहीं, कर्ज़: एक प्रथा जो होते हुए नाम बदल चुकी है
एक नौजवान है। उम्र क़रीब बाईस। एक ईंट के भट्टे पर काम करता है, सुबह से रात तक। पत्नी भी वहीं है, ईंट थापती है। दो छोटे बच्चे हैं, जो…
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राशन कार्ड जो किसी को नहीं खिलाता: एक व्यवस्था जो होते हुए भी नहीं है
महीने का पहला हफ़्ता है। एक महिला अपनी राशन की दुकान पर पहुंची है। हाथ में कार्ड है। पीछे एक बच्चा खड़ा है, थका हुआ। दुकान खुली है, पर ग्राहक…
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गांव की चुप्पी: मानसिक स्वास्थ्य पर वह बात जो हम नहीं करते
एक गांव में एक आदमी है। उम्र क़रीब चालीस। खेत में काम करता है, घर आता है, रोटी खाता है, सो जाता है। बाहर से देखने में सब ठीक है।…
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सरपंच का पति: एक आरक्षण जो आधा रास्ता गया
एक गांव की पंचायत भवन में एक बैठक चल रही है। मेज़ के पीछे सरपंच की कुर्सी पर एक महिला बैठी हैं, साड़ी से सिर ढका हुआ। उनके पीछे एक…
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जो मोहल्ले का अख़बार था, वह कहां गया
एक छोटे क़स्बे की चाय की दुकान को याद कीजिए। पच्चीस साल पहले की। सुबह के सात बजे हैं। दुकान पर लकड़ी की मेज़ है, उस पर एक छोटा सा…
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दो भारत: एक जो निकल सकता है, और एक जो नहीं
एक ही शहर में, एक ही सुबह, दो बच्चे जागते हैं। पहले बच्चे के घर में आरओ का साफ़ पानी है। नाश्ते के बाद एक स्कूल वैन आती है, उसे…